Sunday, August 23, 2009

कविता

शब्दों की लम्बाई से

शब्दों की चौड़ाई से

शब्दों की गहराई से

शब्दों की रसाई से

रिश्ते और जीवन
बनते हैं।

शब्दों की पिटाई से

शब्दों की ढिठाई से

शब्दों की खिंचाई से

शब्दों की घिसाई से

रिश्ते और जीवन
बिगड़ते हैं.

9 comments:

  1. Are Singh SAHEB SHABDH mai hi to SANSAAR hai.

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  2. शब्दों का अच्छा वर्गीकरण किया आपने तो ...बहुत खूब .....!!

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  3. अच्छा वर्गीकरण.

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  4. रिश्ते और जीवन
    बिगड़ते हैं.

    waaqai mein sahi kaha aapne......... shabdon ko bahut hi achche se aapne apni kalam mein dhaala hai...

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  5. बहुत अच्छा

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  6. bahut khoobsurat . thode me bahut kah diya. keep writing and i m there to follow.
    By the way, thanx for being my follower too at my blog "shriarunji@blogspot.com" in "shabdo ke pankh"
    ..... Arun Kumar Mishra

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