Thursday, May 7, 2009

ग़ज़ल

हम तुम न होते
तो ये रिश्ते न होते।

ये रिश्ते न होते तो
जिंदगानी के इतने किस्से न होते।

इतने रस्मो-रिवाज़ न होते
इस दुनिया के इतने हिस्से न होते।

न ज़मीं होती न आसमां होता
इस आसमां में उड़ते परिंदे न होते।

न साज़ होता न आवाज़ होती
जीवन-संगीत के इतने साजिन्दे न होते।

न ख़ुदा होता न खुदाई होती
हर जगह उसके इतने कारिन्दे न होते।

"प्रताप" अगर ये मुल्क न होता तो
हम जैसे उश्शाक सरफ़रोश बाशिंदे न होते।

17 comments:

  1. आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं.

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  2. rishton ki khasoosiat aap ki ghazal me numaya hoti hai.................badhai

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  3. बहुत सुन्दर पंक्तिया.

    चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

    गुलमोहर का फूल

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  4. बहुत अच्छा लिखा है . मेरा भी साईट देखे और टिप्पणी दे
    वर्ड वेरीफिकेशन हटा दे . इसके लिये तरीका देखे यहा
    http://www.manojsoni.co.nr
    and
    http://www.lifeplan.co.nr

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  5. Prabal pratap ji
    bhut achha likha hai aapne...

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  6. blog jagat men swagat. rachna achchi hai.

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  7. काफी अच्छी गजल कहते हैं आप। मेरे ब्लॉग पर भी आएं।

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  8. आपका हार्दिक अभिनन्दन....एक प्रबल अभिव्यक्ती

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  9. हुज़ूर आपका भी ....एहतिराम करता चलूं .......
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ


    कृपया एक व्यंग्य को पूरा करने में मेरी मदद करें। मेरा पता है:-
    www.samwaadghar.blogspot.com
    शुभकामनाओं सहित
    संजय ग्रोवर

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  10. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है. गजल बहुत अच्छी है.

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  11. बे्हतरीन रचना के लिये बधाई। यदि शब्द न होते तो एह्सास भी न होता। मेरे ब्लोग पर आपका स्वागत है। लिखते रहें हमारी शुभकामनाएं साथ है।

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  12. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  13. बहुत सुन्दर पंक्तिया.

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  14. Naaa hum anjaan the, Naa tum naadan the
    bus is jindgi ke jhamelon se pareshaan the.

    Waqt ki karvaton mein jindgi ki silwaton mein,
    is qadar uljhe ki kuchh hairaan the.

    Nahin aasan hai apnon se door rehna, bina doston ke har khushi aur gam se guzarna

    Par kuchh aise majboor hain, apni jaddojahad mein masroof hain, varna dost hum pe aur hum bhi doston pe kurbaan the.

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